09 February, 2018

सुर्ख रंग बदलते नहीं.. | ब्लॉग गुफ्तगू



जब..

छट जाएगी हर धुंध

आसमान की नीली क़बा पे

दिखेगें इन्द्रधनुषी रंग

बसारत कई खुश रंग की,

बसीरत की रंगों से

कहीं धूप, कहीं छांव है,

भागती जिंदगी की दोड़ में

क़ुर्बतों में भी सुर्ख रंग बदलते नहीं

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए 'गुफ़्तगू' ब्लॉग पर जाएं >>>



पम्मी सिंह जी 2015 से ब्लॉग लेखन कर रहीं है। इसके अलावा आप अन्य समूह ब्लॉगों, चर्चा मंचों एवं वेब पत्रिकाओं में निरंतर सक्रिय रहती है और अापका एक कविता संग्रह भी प्रकाशित हो चुका है।


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