07 March, 2018

हर घड़ी | ब्लॉग मेरी आवाज


जिन्दगी में तकाज़े मिले हर घड़ी
उनके बदले इरादे मिले हर घड़ी

जिसपे कुर्बान थी ये मि'री जिन्दगी
प्यार में जख्म ताज़े मिले हर घड़ी

पूरा घर देखने जब गया गाँव को
सारे घर मुझको आधे मिले हर घड़ी




नीलेन्द्र शुक्ल 'नील' जून 2016 से ब्लॉग दुनिया में आए है। ये काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से संस्कृत में स्नातक के छात्र है। आपसे sahityascholar1@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।


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