01 April, 2018

तन्हाई रास आने लगी | ब्लॉग नई सोच


वो तो पुरानी बातें थी
जब हम......
अकेलेपन से डरते थे
कोई न कोई साथ रहे
ऐसा सोचा करते थे
कभी तन्हा हुए तो 
टीवी चलाते,
रेडियो बजाते...
फिर भी चैन न आये तो
फोन करते,
दोस्तों को बुलाते.....
जाने क्यों तन्हाई से डरते थे
पर जब से मिले तुम..!!!
सब बदल सा गया,
बस तेरे ख्यालों में...
मन अटक सा गया..!!!


<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए ब्लॉग 'नई सोच' पर जाएं >>>


सुधा देवरानी जी 2016 से ब्लॉगिग कर रहें है और अपनी कविताओं को नई सोच ब्लॉग के माध्यम से पाठको के बीच रख रहीं है। ब्लॉगर सुधा जी से ई-मेल sdevrani16@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है। 


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