Bloggers Interview - 3 weeks ago

Interview with Blogger : बिहार से इंजीनियर एवं ब्लॉगर विश्व मोहन जी से एक मुलाकात (Updated)

Interview with Blogger की इस सीरीज में हमारी मुलाकात बेहद विलक्षण, विद्वान, कुशाग्र बुद्धि, बहुमुखी प्रतिभा के धनी अति विनम्र स्वभाव के साथ संवेदनशील बहुआयामी व्यक्तित्व विश्वमोहन जी से हुई। वर्तमान में प्रसार भारती के सिविल निर्माण स्कंद में अधिशासी अभियंता विश्वमोहन जी से हमने इस साक्षात्कार में उनके ब्लॉगिग सफर और अब तक के उनके अनुभव को जाना, जिसे हम अापके साथ भी शेयर कर रहे है।

iBlogger Team : विश्व मोहन जी, वैसे तो आप किसी परिचय के मोहताज नहीं है। लेकिन फिर भी हमारे पाठक आपका परिचय आपके शब्दों में जानना चाहते हैं?
Vishwa Mohan ji : मेरा जन्म बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के ‘जोकहा’ गाँव में हुआ। जिला स्कूल, मुंगेर से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की। साइंस कॉलेज पटना से आई.एस.सी. की परीक्षा पास की। आईआईटी रुड़की से सिविल इंजीनियरी में स्नातक, आईआईटी बॉम्बे से स्नाकोत्तर और फिर दिल्ली विश्वविद्यालय से विधि स्नातक की उपाधि ग्रहण की। दो वर्षों तक एन टीपीसी में कार्य करने के पश्चात भारत सरकार की इंजीनियरी सेवा में आ गया। सम्प्रति सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सिविल निर्माण स्कंध में पटना में अधिशाषी अभियंता के पद पर स्थापित हूँ।

iBlogger Team : आप एक इंजीनियर हैं फिर साहित्य के प्रति आपकी रुचि कैसे जागृत हुई?
Vishwa Mohan ji : इंजीनियरी और साहित्य में मुझे तो कोई पारस्परिक प्रतिरोध परिलक्षित नहीं होता! एक बुद्धि-उद्भूत ज्ञान का व्यावहारिक विज्ञान तो दूसरा मन की हहराती भावनाओं का निर्झर-वितान। हमारी वेदान्तिक दर्शन धारा में भी तो यहीं गूंजता है कि मन, बुद्धि और अहंकार, इन सबका का एक ही उद्गम है- हमारी आत्मा। अतः इंजीनियरी और साहित्य दोनों मूल में मानव मात्र की आत्मा की ही उपज तो हैं। दोनों ‘स-हित’ हैं। इंजीनियरी मेरा गेहूं है तो साहित्य मेरा गुलाब। इसी मौलिक सत्य के आलोक में मेरे प्रारम्भ के जीवन के ग्रामीण परिवेश ने भी लगता है कि मुझे जीवन की प्रकृति और उसके पुरुष-तत्व को निकट से निहारने का अवसर दिया होगा और फिर जीवन के स्पंदन का रस चखने की चाहत जगा दी हो। अभी कल ही मैंने अपने गुरु और साहित्यकार अरुण कमल जी को ‘पाब्लो नरूदा’ की यह उक्ति दुहराते सुना कि ‘रोटी और कविता सबको मिलनी चाहिए।’ तो फिर आप यूँ समझ लीजिये कि इंजीनियरी मेरी रोटी है और साहित्य मेरी कविता।

iBlogger Team : विश्व जी, आप 2014 में ब्लॉगिंग में आए, क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि आपने ब्लॉग दुनिया में आने में बहुत देर कर दी है?
Vishwa Mohan ji : भला हो मेरे सुहृद भ्राता, मातुल-सुत-मन्नू (आदित्य रंजन, इलेक्ट्रोनिक इंजिनियर), का, जिन्होंने एक दिन मेरे लिए एक ब्लॉग बनाकर दे दिया – ‘ विश्वमोहन उवाच’ और उसी दिन मेरी तब तक की उन्हें उपलब्ध सारी तेईस रचनाओं को डाल दिया। फिर कहा- ‘आगे इसी पर लिखा कीजिये’। उनकी बात मान ली। वरना, ब्लॉग पर शायद आज तक मैं नहीं रहता । हाँ, बहुत बाद में एक और ब्लॉग ‘गलथेथरई’ जरुर मैंने खुद बना लिया। ऐसे भी मैं कोई नियमित और पारंपरिक लेखक भी तो नहीं! उलटे तो, मुझे भरसक यह लगता है कि समय पर ही ब्लॉग की दुनिया में ला दिया गया, जहां मुझे इतना प्यार और स्नेह मिला।

iBlogger Team : विश्व मोहन जी, ब्लॉगिंग के अलावा आपकी क्या रुचियाँ हैं?
Vishwa Mohan ji : ब्लॉगर के अलावे मेरी रूचि पठन-पाठन, खूब गप-शप मारना और यात्रा करने में है।

iBlogger Team : आपकी पसंदीदा विद्या कौन सी है, जिसमें आप ज्यादा लिखना पसंद करते है?
Vishwa Mohan ji : मेरी पसंदीदा विधा मूलतः गद्य-लेखन है। किन्तु, गद्य-लेखन में समय और एकाग्रता ज्यादा जरुरी है। इन दोनों का अभाव होने के कारण मैं अपनी प्रिया विधा का साथ अधिक नहीं निभा पाता। इसकी कसक भी मुझको रहती है। इसलिए दुसरे लेखों को मैं खूब पढ़ता हूँ। कविताओं के क्षेत्र में तो मैं घुसपैठिया हूँ।

iBlogger Team : आपका सबसे पसंदीदा ब्लॉग का नाम क्या है, जिसे आप सबसे ज्यादा पढ़ते है और क्यों?
Vishwa Mohan ji : सारे लेखक अच्छे लगते हैं मुझे। सब कुछ न कुछ विशिष्टताओं से अलंकृत हैं। फिर भी यदि सच कहूँ तो अपने जीवन में जिस पहले ब्लॉग से मेरा साक्षात्कार हुआ, ‘ओझा-उवाच’ आज भी मुझे बहुत लुभाता है। गौतम ऋषिराज जी का ब्लॉग भी मुझे बहुत पसंद है। इसके अलावे अपने फेसबुक मित्र के के अस्थाना और एस एन मिश्र की रचनायें मुझे बहुत प्रिय हैं। इन सबकी रचनाओं में मुझे गहन चिंतन और मौलिकता के दर्शन होते हैं।

iBlogger Team : आप अपने ब्लॉग की रचनाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत किसे मानते है?
Vishwa Mohan ji : मेरी रचनाएं मेरी अंतर्भूत एकान्तिक अभिव्यक्ति हैं जिनकी प्रेरक शक्ति इस चराचर जगत में पुरुष और प्रकृति की वो समस्त दृश्य और अदृश्य लीलाएं हैं जो हमारी चेतना से अनुभूत हैं। अचेतन और अवचेतन में मेरी माँ से मिली मानवीय भावनाओं की सघन चेतना हमारे विचारों को रस प्रदान करती है, ऐसी मेरी अनुभूति है। हाँ, इस बात को भी हम इमानदारी से स्वीकारते हैं कि कतिपय लेखक, ब्लॉग जगत के भीतर और बाहर दोनों भी ऐसे हैं जो कहीं न कहीं मुझे ‘टच’ करते हैं और मुझमें प्रेरणा की ऊर्जा भरते हैं।

iBlogger Team : विश्व मोहन जी, आपके जीवन में ऐसी कोई घटना घटी है, जो पाठकों के लिए प्रेरणादायक हो।
Vishwa Mohan ji : यह जीवन तो घटनाओं का व्यतिक्रम मात्र है। रोज घटती-बढ़ती हैं। फिर भी उनमें से कुछ ख़ास ऐसी भी होती हैं जो यादों के गलियारों में डेरा डाले लेटी हैं और सदा किलकारी मारकर आपको गुदगुदाती रहती हैं। एक वैसी ही घटना है। मैट्रिक की बोर्ड परीक्षा में बैठने की पात्रता का निर्णय करने वाली स्कूल की ‘प्री-टेस्ट-सेंट-अप-परीक्षा’ में मैं हिंदी में फेल हो गया। मेरी जबदस्त धुलाई (या धुनाई!) हुई। ये वो दिन होते थे जब घर में यदि पता चल जाए कि स्कूल में मास्टरजी ने आपको दो थप्पड़ मूलधन रसीद किये हैं तो घर में लातों का ब्याज लाजिमी होता था। खैर उस धुनाई ने मुझे जीवन-दर्शन का सार समझा दिया। मुझे वटवृक्ष की छाया मिल गयी थी और मैंने बोधिसत्व का अनुभव कर लिया था। तीन महीने बाद होने वाली बोर्ड परीक्षा में मैं बैठा। परीक्षाफल भी आया। न केवल मैं टॉप किया बल्कि हिन्दी में मुझे सत्तर प्रतिशत अंक आये जो उन दिनों साहित्य में काफी अच्छे अंक माने जाते थे। कहने का मतलब है सब कुछ आपके अन्दर है। बस दरकार है तो ‘जहां चाह, वहीं राह’।

iBlogger Team : आपको क्या लगता है एक लेखक की क़लम का उद्देश्य आत्मसंतुष्टि हो या साहित्य और समाज कल्याण?
Vishwa Mohan ji : समाज ही साहित्य का लक्ष्य है और व्यक्ति समाज की इकाई। आप परमाणु को अणु और अणु को तत्व से विलग भला कैसे कर सकते हैं। परमाणु के अन्दर घूर्णन करने वाले इलेक्ट्रान का ऊर्जा स्तर और ऑर्बिटल भले ही भिन्न भिन्न हो, उनकी समवेत सहभागिता अपने तत्व की सम्पूर्णता को बनाए रखने में ही होती है और फिर उसी सम्पूर्णता में आत्मसंतुष्टि का राज छिपा है।

iBlogger Team : आपकी रचनाओं में साहित्य की लुप्तप्राय समृद्ध शब्दावलियों के साथ-साथ आँचलिक भाषा का समन्वय मिलता है, आप इस पर क्या कहेंगे?
Vishwa Mohan ji : कहा न, मेरा ग्रामीण परिवेश हमको सदा आंचलिकता की चादर में लपेटे रहता है। साहित्य के शब्द हमारी विरासत हैं। बहुत बड़ी थाती दी है हमारे पुरखों ने शब्दों की। यदि कुछ नया नहीं बना सके तो कम से कम अपनी विरासत तो बचा लें।

iBlogger Team : क्या आपने हिन्दी को अपने कार्यालय में भी प्रमुखता दिलवाने की कोशिश की है? आप हिन्दी दिवस कैसे मनाते हैं?
Vishwa Mohan ji : जी, जरुर। और सरकार की भी बड़ी सक्रिय और सकारात्मक नीति है इस विषय में। हम उत्साहित करते हैं कि यथा संभव टिप्पणियाँ हिन्दी में ही दर्ज हों, संचिकाओं में। हिंदी-उत्सवों के आयोजन में हम विविध प्रतियोगिताएं आयोजित करते हैं और कर्मचारियों को पुरस्कृत कर उत्साहित करते हैं। जो कुछ भी हो, हम बस करते हैं, घोषणायें नहीं करते।

iBlogger Team : एक साहित्यकार के रुप में आपके मित्र और परिवार के लोग आपको कितना पंसद करते है?
Vishwa Mohan ji : मित्र तो सकारात्मक ही लगते हैं। किन्तु, परिवार में झुंझलाहट का झंझावात रह रह के दिख जाता है। शायद, मैं , उनकी निगाहों में (!), ब्लॉग, ब्लॉगर और सोशल साईट पर जरुरत से ज्यादा ही रम जाता हूँ। हालांकि मेरी पत्नी, पूनम मोहन, स्वयं एक सधी कवयित्री और ब्लॉगर (पूनम की लहरें) हैं। लेकिन पहले मैं उनका पति हूँ न! मेरी छोटी पुत्री, वीथिका, भी बहुत अच्छी कविताएँ लिखती है, किन्तु यदा कदा।

iBlogger Team : आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रति आप क्या दृष्टिकोण रखते हैं? आपके विचार से साहित्य को और समृद्ध बनाने के लिए क्या क़दम उठाया जाना चाहिए?
Vishwa Mohan ji : आधुनिक हिन्दी साहित्य के प्रति मेरा दृष्टिकोण अत्यंत सकारात्मक और आशावान है। इस दिशा में सोशल साईट ने भी नयी ऊर्जा भरी है। विशेषकर आधी दुनिया जो अबतक ‘असूर्यपश्या’ सी परदे के भीतर और हाशिये पर थी, एक बड़ी साहित्यिक शक्ति बनकर सामने आ गयी है। महादेवी वर्मा, सुभद्रा कुमारी चौहान जैसी सारस्वत प्रतिभा की प्रखरता धारण कर अनेक महिलायें भारतीय साहित्य की धरा पर अपनी लेखनी का जादू रचने लगी हैं। बस एक ही गुजारिश है सभी साहित्यकारों से। वह लेखन की स्थूल ऐंद्रिकता से ऊपर उठकर सृजन की सूक्ष्म आध्यात्मिकता में प्रवेश करें। संकीर्ण पंथ आधारित विमर्श की उच्छृंखल परंपरा के कपडे फेंक ‘सर्वजन हिताय,सर्वजन सुखाय’ के शाश्वत भारतीय दर्शन के परिधान से साहित्य को सजाएं। साहित्य मानवीय मूल्यों पर हो, न कि किसी वाद या पंथ का घोषणा पत्र। अपनी मौलिकता का साथ कतई न छोड़ें।

iBlogger Team : क्या अब तक आपकी कोई साहित्यिक पुस्तक प्रकाशित हुई है? हमें आपके काव्य संग्रह अंजुरी की खबर भी प्राप्त हुई है, उसके बारे में भी कुछ बताएं।
Vishwa Mohan ji : सही खबर है आपको। हमारे मित्र अमित राय प्रकाशक हैं, (एएमएस पब्लिकेशन, पटना)। एक दिन मेरे घर पर मेरी कविताओं के कुछ बिखरे पन्ने मिले उन्हें। सहेज लिया उन्होंने। इस तरह उनके सहेजने का क्रम जारी रहा और जब कविताओं की संख्या तीस हो गयी, छाप दिया उन्होंने। यह पुस्तक उनकी जिद और मेरे प्रति अप्रतिम स्नेह का प्रतिफल था। पुस्तक पर बड़े बड़े साहित्यकारों, समाचार-पत्रों और साहित्य-सुधियों की बड़ी उत्साहवर्द्धक समीक्षाएं आयी। इस तरह मेरे मित्र ने मुझे अपने पहले काव्य-संग्रह का लेखक बना दिया। अब भी मेरे पास तीन पुस्तकों की सामग्री एकत्रित है किन्तु समयाभाव में मुहूर्त नहीं बन पा रहा है। हाँ, एक पुस्तक ‘सबरंग क्षितिज’ के नाम से दस ब्लोगर्स की साझा योजना के तहत छप रही है जिसमें मेरी रचनाओं को भी शामिल किये जाने का सौभाग्य मिला है। अगले पुस्तक मेला तक आ जाये शायद।

iBlogger Team : जो लोग ब्लॉग लिखने या बनाने के लिए विचार कर रहे है, उनके लिए क्या कहना चाहेंगें?
Vishwa Mohan ji : जरुर बनाएं ब्लॉग। किन्तु, बस एक सुझाव है मेरा। पढ़ें ज्यादा और लिखें कम। रचनाओं की स्तरीयता के स्तर पर हमेशा बड़ी रेखा खींचने का प्रयास करें।

iBlogger Team : iBlogger लिए आपके लिए कोई सुझाव या विचार?
Vishwa Mohan ji : जरुर। ये लोगों में साहित्यिक चेतना का अलख जगाने का सद्प्रयास जो आप कर रहे हैं न, नमनीय है। इसे जारी रखें। साहित्य का अभाव ही समाज को हिंसक बना देता है। साहित्य पीढ़ियों को संस्कार और जीवन का सौन्दर्य देता है। इसलिए आपके इस पुनीत यज्ञ के लिए मेरी अशेष शुभकामनाएं आपको!

विश्व मोहन जी के ब्लॉग का लिंक : विश्वमोहन उवाच

कॉलम Interview with Blogger में विश्व मोहन जी से मिलकर आपको कैसा लगा हमें जरूर बताएं। यदि आपके मन में कोई सवाल है तो आप कमेंट के माध्यम से पूछ सकते है।



21 Comments

  1. आदरणीय विश्वमोहन जी को हार्दिक बधाई और शुभकामनायें | उनके बारे में जानकर बहुत ख़ुशी हुई | लिखते तो वे अच्छा है ही जो सदैव सराहना से परे होता है | उनके जीवन के बारे में जानना बहुत रोचक है | iblogger को साधुवाद |

  2. बिहार की उर्वर भूमि ने साहित्य जगत को सदैव ही साहित्य रत्न दिये हैं | तकनीक और साहित्य का संयोग बहुत सुखद और साहित्य के लिए मंगलकारी है | हिन्दी भाषा ऐसे ही साहित्यानुरागियों की वजह से फल फूल रही है | आभार iblogger|

    1. बहुत ही सराहनीय।
      आप तो प्रारंभ से ही बहु मुखी प्रतिभा के व्यक्ति रहे हैं।
      आशा करते हैं हम सब आपको आगे भी सुनते रहेंगे, पढ़ते रहेंगे।

      सुभकामनाए
      प्रीति द्विवेदी

  3. ब्लॉग जगत में विश्व मोहन जी जाने पहचाने नाम हैं … अपनी विशिष्ट शैली और लेखन के निराले अंदाज़ के लिए जाने जाते हैं वो ब्लॉग जगत में …
    अनेक वर्षों से निरंतर उनको पढता आ रहा हूँ और हर बार उनकी रचना की नवीनता में खो जाता हूँ …
    बहुत ही अच्छा लगा उनको और भी जानना … आपका आभार है …

  4. श्री विश्व मोहन जी के साक्षात्कार के माध्यम से उनके व्यक्तित्व के अनेक पहलूओं की जानकारी मिली । साहित्य और तकनीकी ज्ञान का अद्भुत संयोजन। बहुत बहुत धन्यवाद श्वेता जी इस साक्षात्कार के लिए ?

    1. सादर आभार आपका पम्मी जी,हृदयतल से बेहद आभार आपका।

  5. iBLOGGER का हार्दिक धन्यवाद लब्धप्रतिष्ठित ब्लॉगर आदरणीय विश्व मोहन जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व से परिचय कराने के लिये। विस्तृत भेंटवार्ता में विचारों की गहनता परिलक्षित हो रही है। ब्लॉग जगत् में विश्व मोहन जी एक सुपरिचित नाम हैं। समकालीन साहित्य के विषयों और प्रासंगिक मुद्दों पर विश्व मोहन जी अपनी बेबाक राय रखने में कभी नहीं हिचकिचाते हैं।

    आदरणीया श्वेता सिन्हा जी द्वारा प्रस्तुत उपरोक्त भेंटवार्ता प्रेरक एवं उपयोगी है। बधाई एवं शुभकामनाऐं।

  6. विश्व मोहन जी की कई रचनाएँ पढ़ी हैं भाषा और भावों पर उनकी गहरी पकड़ है | इस साक्षात्कार के माध्यम से उनके साहित्यिक दृष्टिकोण के बारे और जानने को मिला | इस साक्षात्कार को उपलब्द्ध कराने के लिए शुक्रिया

  7. आदरणीया श्वेता जी, आपका हार्दिक अभिनंदन कि आपने एक ऐसे महान रचनाकार के बारे में गहनता से जानने का मौका दिया जिनके बारे में अति अल्प जानकारी सार्वजनिक थी।
    आदरणीय विश्वमोहन जी, हृदय पुलकित हो गया आपके व्यक्तित्व एवं विचारों से अवगत होकर। भावी भविष्य के लिए अनवरत मंगलकामनाएँ💐💐💐

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