Articles - February 1, 2018

परवरिश- ऐसे दे बच्चों को सच बोलने की प्रेरणा | ब्लॉग आपकी सहेली

चाहे कैसी भी परिस्थितियां हो सच अपने आप में एक ऐसा अस्त्र हैं जो इंसान को बड़ी से बड़ी मुसीबत से लड़ने की ताकत देता हैं। अत: ऐसे दे बच्चों को सच बोलने की प्रेरणा। माता-पिता बचपन से ही बच्चों को सच बोलना सिखाते हैं। परवरिश का एक बड़ा हिस्सा हैं कि चाहे कितनी भी बड़ी ग़लती हो जाए लेकिन हमेशा सच बोले। लेकिन इसके बावजूद बच्चे अपनी ग़लती छुपाने के लिए झूठ का सहारा लेते हैं। अपने नन्हें में सच बोलने की आदत का विकास कैसे करें, इसके लिए कुछ तरीके आपको ख़ुद आजमाने होंगे। जिन्हें बच्चे सीख सकेंगे।

खुलकर बात करें-

मैं नहीं चाहती कि मेरी नाराजगी या डांट के डर से मेरे बच्चे मुझसे झुठ बोले और किसी मुसीबत में फंस जाएं। कभी बच्चों से जाने-अनजाने कोई गलती हो जाती हैं, तो कभी बच्चों के अपेक्षा अनुसार मार्क्स नहीं आते, तो कभी बच्चे किसी और की साजिश का शिकार हो जाते हैं- इन सभी परिस्थितियों में बच्चों को लगता हैं कि यदि हमने घर में सच बतलाया तो मम्मी-पापा मारेंगे, डाटेंगे या नाराज होंगे। बचपन में मम्मी-पापा की नाराजगी से बचने के लिए बच्चे छोटे-छोटे झूठ बोलना शुरु करते हैं। धीरे-धीरे वे सच न बोलने के इतने आदी हो जाते हैं कि उन्हें ख़ुद ही पता नहीं होता कि एक दिन में वे कितनी बार झूठ बोलते हैं! इसी सच न बोलने की आदत के चलते बच्चों और माता-पिता के बीच एक तरह की संवादहीनता आ जाती हैं। और आगे चल कर इस का परिणाम इतना भयानक होता हैं कि छोटी-छोटी समस्या भी वे माता-पिता से शेयर नहीं कर पाते और अकेलेपन से जुझते हुए आत्महत्या तक कर बैठते हैं!! ग़लती होने पर उन्हें डरा कर नहीं बल्कि प्यार से पूछें। इससे वे आपसे बात करने में हिचकिचाएंगे नहीं।

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ज्योति देहलीवाल जी एक गृहणी है और महाराष्ट्र में निवारसरत है। आप 2014 से ब्लॉग लिख रही है। उनके ब्लॉग पर विभिन्न विषयों से संबधित रोचक जानकारियां और सामाजिक व घरेलू टिप्स आदि ढ़ेरो जानकारीवर्द्धक लेखो की काफी लम्बी श्रृखला है। ज्योति जी से ई-मेल jyotidehliwal708@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है और उन्हे Facebook पर फालो कर सकते है।


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