Articles - September 10, 2018

हर गीत तुम्हारे नाम लिखूंगी | ब्लॉग मन से

हे मितवा मनमीत मेरे
हर गीत तुम्हारे नाम लिखूंगी
शब्दों में जो बंध ना पाये
ऐसे कुछ अरमान लिखूंगी

प्रीत के पथ के हम दो राही
तेरा नेह बनाकर स्याही
अपने अनुरागी जीवन में
तुझको अपनी जान लिखूंगी

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए ‘मन से’ ब्लॉग पर जाएं >>>


नीतू ठाकुर जी ने अक्टूबर 2017 में ब्लॉग लेखन शुरू किया है। अब तक आप अन्य समूह ब्लॉगों, चर्चा मंचों एवं वेब पत्रिकाओं में निरंतर सक्रिय रहती है।

1 Comment

  1. समर्पण का ख़ूबसूरत राग।
    बकौल डॉक्टर कुँवर बेचैन -“प्रेम का आधार इंतज़ार माना जाता है।”
    प्रभावशाली रचना है जिसमें प्रणय की अभिव्यक्ति में निखार झलक रहा है।
    बधाई एवं शुभकामनायें।

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