Literature - April 13, 2017

ओ माय गॉड…तुमने निचली जाती की महिला को काम पर रखा | आपकी सहेली

कुछ दिनों पहले मैंं ने निचली जाती की महिला को काम पर रखा। धीरे-धीरे यह बात मेरी सहेलियों को पता चल गई। भई, कामवाली बाई के बारे में सबसे पहले सहेलियों को ही तो पता चलेगा न! मेरे पीठ पिछे वो मेरे बारें में बातें बनाने लगी। लेकिन वो सहेलियाँ ही क्या, जो सिर्फ़ पीठ पिछे बातें करें! सहेलियाँ तो आमने-सामने मिलने पर भी खुलकर बात कर सकती है। अत: जैसे ही हम लोग मिले, सभी सहेलियाँ मिलकर मेरी खिंचाई करने लगी। वो मेरी ओर कुछ अजीब सी नजरों से देखने लगी। जैसे मैंने बहुत बड़ा गुनाह किया हो!
“ओ माय गॉड…तुमने निचली जाती की महिला को काम पर रखा!!!”
मैंने पूछा,“क्यों, क्या हुआ? मुझे कामवाली बाई की जरुरत थी। इस महिला का स्वभाव बहुत अच्छा है, ये काम बहुत साफ़-सफ़ाई से और अच्छा करती है। ऐसे में इसे काम पर रखने में क्या अड़चन है?”
“अरे…वो सब तो ठीक है। लेकिन जात-पात भी कोई मायने रखती है कि नहीं? हम तो चाहे कुछ भी हो जाएं…गंदे बर्तन और कपड़ों का ढ़ेर पड़ा रहे तो रहे…घर गंदा रहे तो रहे…लेकिन हम भुल कर भी निचली जाती वाली को काम पर नहीं रखते!”
“आखिर निचली जाती के लोगों में ऐसी क्या खराबी है, जो आप लोग उन्हें काम पर नहीं लगाते?”
“ख़राबी निचली जाती के लोगों में नहीं है। ख़राबी उनकी जात में है। निचली जाती के लोग अच्छे नहीं होते। हमारे खानदान में आजतक किसी ने उन्हें काम पर नहीं रखा। इसलिए हमें भी हमारे बुजुर्गों के पदचिन्हों पर चलते हुए इन लोगों को काम पर नहीं रखना चाहिए।”

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ज्योति देहलीवाल जी एक गृहणी है और महाराष्ट्र में निवारसरत है। आप 2014 से ब्लॉग लिख रही है। उनके ब्लॉग पर विभिन्न विषयों से संबधित रोचक जानकारियां और सामाजिक व घरेलू टिप्स आदि ढ़ेरो जानकारीवर्द्धक लेखो की काफी लम्बी श्रृखला है। ज्योति जी से ई-मेल jyotidehliwal708@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है और उन्हे Facebook पर फालो कर सकते है।

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