Literature - October 18, 2017

दिव्य प्रकाशमय दीपावली | ब्लॉग ऊंचाईयाँ

त्यौहार यानि, हर्षोल्लास, उमंग, उत्साह, दीपावली का त्यौहार, दिल में नया उत्साह, नयी उमंग सबसे बड़ा काम घर की साफ़-सफाई।

माँ पास आकर बोली, कल शनिवार है, परसों रविवार, कल और परसों तेरी, आफ़िस की छुट्टी है, ये नहीं की देर तक सोती रहे, कल जल्दी उठ जाना चार दिन बाद दीवाली है, अभी तक ढंग से साफ़-सफाई भी नहीं हुई, कल सुबह काम वाली बाई के साथ मिलकर अच्छे से सफाई करवा लेना ।
बेटी मीता बोली हाँ माँ, मैं भी यही सोच रही थी, फिर सजावट भी तो करनी होगी, माँ पता है, बाज़ार में बहुत सूंदर-सूंदर सजावट का सामान आ रखा है।
इतने में दो पड़ोसी बच्चे आ गये, कहने लगे बुआ जी आपने कहा था, जब अगले साल हम आठ साल के हो जायेंगे, तब आप हमें पटाखे दिलायेंगी।
मीता बोली पटाखे?
बच्चे बोले बुआ आपने बोला था अगले साल तुम और बड़े हो जाओगे तब तुम्हें बहुत सारे पटाखे दिलाऊंगी।
मीता बुआ कहती है, पटाखे तो मैं तुम्हें दिल दूँगी, लेकिन बताओ, पटाखे जला कर तुम्हें फायदा क्या मिलेगा?
बच्चे बोले बुआ जी, बता है, बाजार में कितने अच्छे-अच्छे पटाखे आ रखे हैं।
दीदी बोली मुझे सब पता है, पर ये बताओ पटाखे जलाकर तुम्हे फायदा क्या मिलेगा?
बच्चे बोले, बुआ पटाखे जलाकर बहुत अच्छा लगेगा, मेरा एक दोस्त है, ना उसके पापा तो उसके लिये बहुत सारे पैसों के पटाखे ले भी आये हैं।
बुआ मीता बोली अच्छा, फिर तो उन्होंने पटाखे लाकर अपने पैसे तो बर्बाद करे ही, साथ मे वातावरण को दूषित करने का सामान भी ले लिया।
तुम जानते हो बच्चों पटाखों में अनगिनत जहरीली रसायन होते हैं और जब हम उन्हें जलाते हैं तो उनमें से जहरीले रसायनों का धुआँ हमारे आस-पास के वातावरण को दूषित करता है और जब हम साँस लेते हैं तब हमारी साँसों के साथ हमारे शरीर में जाकर हमे भी बीमार करता है, इन पटाखों से बहुत ही जहरीले रसायन निकलते हैं बच्चों।
बच्चे, बुआ जी आप हमें पटाखे नहीं दिलाना चाहती तो साफ-साफ मना कर दो।
बुआ को लगा बच्चे अब तो नाराज़ ही हो रहे हैं,बुआ बोली सुनो बच्चों मैं तुम्हें पटाखे दिलाऊंगी, जिसमें थोड़ी सी फुलझड़ियां होंगी चरखी होगी।
इस बार की दीवाली को हम बहुत शानदार और अलग ढंग से मनायेंगे, बहुत मजा आयेगा, आज मुझे घर की साफ-सफाई करने दो। दीपावाली का त्यौहार  हम एक साथ मनायेंगे।

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए ‘ऊंचाईयां’ ब्लॉग पर जाएं >>>

 


श्रीमती रितु आसूजा जी सन 2013 से ब्लॉग लिख रहीं है और तब से लेकर अब तक प्रेरक और समाजिक लेखन के जरिए ब्लॉग जगत में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। उनसे ई-मेल ritu.asooja1@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है। रितु जी काे फेसबुक पर फालों करने के लिए यहां क्लिक करें।

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