Poem - April 1, 2018

आग है लगी हुयी | ब्लॉग ऊंचाईयाँ

जिधर नज़र दौड़ायी

नज़र आया बस कूड़ा ही कूड़ा
कूड़े के ढेर पड़े हुए हैं
जगह -जगह ……
आग लगी हुई है
चमकते चेहरों पर जब
नज़र टिकती है ……..
तब नज़र आती है एक आग
आग विचारों रूपी
कूड़े के ढेरो की आग
कूड़ा बस कूड़ा ही कूड़ा
जब गहरायी में उतरा तो
नज़र आयी गंदगी ही गंदगी

गन्दगी में पनपते ज़हरीले जीवाणु …..

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए ‘ऊंचाईयां’ ब्लॉग पर जाएं >>>

 


श्रीमती रितु आसूजा जी सन 2013 से ब्लॉग लिख रहीं है और तब से लेकर अब तक प्रेरक और समाजिक लेखन के जरिए ब्लॉग जगत में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। उनसे ई-मेल ritu.asooja1@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।

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