Poem - October 10, 2017

आराम चाहिए | ब्लॉग नई सोच

आज हर किसी को आराम चाहिए

न हो हाथ मैले,न हो पैर मैले….
ऐसा अब कोई काम चाहिए…
बिन हिले-डुले कुछ नया कर दिखायेंं!!
हाँ! सुर्खियों में अपना अब नाम चाहिए
आज हर किसी को आराम चाहिए…
मुश्किलें तो नजर आती हैं सबको बड़ी-बड़ी,
स्वयं कुछ कर सकें, ऐसी हिम्मत नहीं पड़ी।
सब ठीक करने वाला, अवतारी आये धरा पर,
नरतनधारी कोई “श्रीकृष्ण या श्रीराम” चाहिए!!
आज हर किसी को आराम चाहिए…
बच्चों को दिखाते हैं, ये अन्तरिक्ष के सपने !

जमीं में नजर आये न इनको कोई अपने

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए ब्लॉग ‘नई सोच’ पर जाएं >>>

 


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