Poem - April 1, 2018

उम्मीद मन सम्राट है | ब्लॉग मन से

अंत ही आरंभ है,प्रारंभ करता नवसृजन
उद्देश्य की पूर्ति करे, उम्मीद का पुनः जन्म
शाश्वत ये सत्य विराठ है, उम्मीद मन सम्राट है
आरंभ से पहले है वो , वो अंत के भी बाद है
सृष्टि का सृजन हुआ जिस पल
जीवन का कोई अर्थ न था
क़ुदरत की अद्भुत  रचना का
उद्देश्य कभी भी व्यर्थ न था
उम्मीद का सूरज जब निकला
जीवन को एक आकार मिला
ईश्वर के रूप में मानव को

क़ुदरत का एक उपहार मिला

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए ‘मन से’ ब्लॉग पर जाएं >>>

 


नीतू ठाकुर जी ने अक्टूबर 2017 में ब्लॉग लेखन शुरू किया है। अब तक आप अन्य समूह ब्लॉगों, चर्चा मंचों एवं वेब पत्रिकाओं में निरंतर सक्रिय रहती है।

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