Poem - March 21, 2018

ऐ बसंत! तुम सबको खुशियों की वजह दे दो… | ब्लॉग नई सोच

ऐ रितुराज बसंत ! तुम तो बहुत खुशनुमा हो न !!!

आते ही धरा में रंगीनियां जो बिखेर देते हो…..
बिसरकर बीती सारी आपदाएं……….
खिलती -मुस्कराती है प्रकृति, मन बदल देते हो,
सुनो न ! अब की कुछ तो नया कर दो………
ऐ बसंत ! तुम सबको खुशियों की वजह दे दो।
हैं जो दुखियारे, जीते मारे -मारे……..
कुछ उनकी भी सुन लो, कुछ दुख तुम ही हर लो,
पतझड़ से झड़ जायें उनके दुख,कोंपल सुख की दे दो…
ऐ बसंत ! तुम सबको खुशियों की वजह दे दो ।
तेरे रंगीन नजारे, आँखों को तो भाते हैं……
पर  लब ज्यों ही खिलते हैं, आँसू भी टपक जाते हैं,
अधरों की रूठी मुस्कानो को हंसने की वजह दे दो……
ऐ बसंत! तुम सबको खुशियों की वजह दे दो ।

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए ब्लॉग ‘नई सोच’ पर जाएं >>>

 


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