Poem - May 9, 2018

कहानी अधूरी, अनुभूति पूरी -प्रेम की | ब्लॉग मन के पाखी

उम्र के बोझिल पड़ाव पर
जीवन की बैलगाड़ी पर सवार
मंथर गति से हिलती देह
बैलों के गलेे से बंधा टुन-टुन की
 आवाज़ में लटपटाया हुआ मन
अनायास ही एक शाम
चाँदनी से भीगे
गुलाबी कमल सरीखी
नाजुक पंखुड़ियों-सी चकई को देख
हिय की उठी हिलोर में डूब गया
कुंवारे हृदय के
प्रथम प्रेम की अनुभूति से बौराया
पीठ पर सनसनाता एहसास बाँधे
देर तक सिहरता रहा तन
मासूम हृदय की हर साँस में
प्रेम रस के मदभरे प्याले की घूँट भरता रहा

मताया

 

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए ‘मन के पाखी’ ब्लॉग पर जाएं >>>


श्रीमती श्वेता सिन्हा जी ने सन 2017 से ही ब्लॉग लिखना शुरू किया है और तब से लेकर अब तक 150 से ऊपर रचनाएं लिख चुकीं है। उन्होने इतने कम समय में भी ब्लॉग दुनिया में अपनी व अपने ब्लॉग की बेहतर पहचसन बना ली है। वैसे इस पहचान के लिए उनके लेखन को ही इसका श्रेय दिया जा सकता है। उनसे ई-मेल swetajsr2014@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।

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