Poem - September 7, 2017

गौरी लंकेश की मौत पर | ब्लॉग बोल सखी रे

तुमने एक सच को मारना चाहा

वो तुम्हे मरकर भी अंगूठा दिखा रहा है!
कलम है, रुक नहीं सकती
शब्द मौन नहीं हो सकते
कितनी ही कर लो कोशिश
दबा लो गला
काट दो नाड़ी
विक्षिप्त घोषित कर दो
ओढा दो कफ़न
दफ़न नहीं कर सकते सच्चाई.
खुश भले हो लो दो-चार को मार कर

 

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए ‘ब्लॉग बोल सखी रे’ ब्लॉग पर जाएं >>>

 


अपर्णा बजपेयी जी जम्शेद्पुर में रहती है। आपने 2016 में ही ब्लॉग लेखन शुरू किया है और वर्तमान में झारखंड में आदिवासियों के बीच स्वास्थ, शिक्षा, आजीविका के मुद्दे पर काम कर रहीं है। दैनिक हिन्दुस्तान, जन संदेश टाइम्स, कथाक्रम तथा अन्य कई पत्र पत्रिकाओं में आपकी कविता और कहानियां प्रकाशित हो चुकी हैं।

यदि आप भी अपनी ब्लॉग पोस्ट को अधिक से अधिक पाठकों तक पहुंचाना चाहते है। तो अपने ब्लॉग की नई पोस्ट की जानकारी या सूचना हमें दें। अपनी ब्लॉग की पोस्ट शेयर करने के लिए अपने ब्लॉग पोस्ट का यूआरएल और अपने बारे में संक्षिप्त जानकारी एवं फोटो सहित हमें – iblogger.in@gmail.com पर ई-मेल करें।



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *