Poem - June 9, 2017

घर के बड़े बुजुर्ग | ब्लॉग शब्दों की मुस्कुराहट

घर के बड़े बुजुर्ग

जो बाँटना चाहते है अपनी
उम्र का अनुभव
अपने बच्चो अपने पोते पोतियों के साथ
समझाना चाहते है उन्हें
दुनियादारी के तौर तरीके
पर आज की पीढ़ी नहीं लेना चाहती
उनके अनुभव व विचार
जो सिर्फ अपनी ही चलाना चाहते है
लेकिन हमारे पढ़े लिखे होने से दुनियादारी
नहीं चलती
अनुभव का होना बहुत

ज़रूरी है

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें >>>

 


संजय भास्कर जी 2009 से ब्लॉगिग कर रहें है और समाज के विभिन्न मुद्दों को कविताओं के माध्यम से समाज के सामने रखते है। इसके साथ ही भास्कर जी अपने ब्लॉग पर लेख व कहानियां भी लिखते है। ब्लॉगर भास्कर जी से ई-मेल sanjay.kumar940@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है।

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