Poem - February 19, 2018

जब डालती है ख्वाबों में खलल.. | ब्लॉग गूफ्तगू

वाकिफ तो होेगें इस बात से..

इन पलकों पे कई सपने पलते हैं
उफ़क के दरीचों से झाँकती शुआएं
डालती है ख्वाबों में खलल..
जो अस्बाब है
गुजिश्ता लम्हों की,
पर ये सरगोशियाँ कैसी?
असर है
जो  एक लम्हें के लिए..
शबनमी याद फिर से मुस्कराता है
पन्ने है जिंदगी के..जिनसे

 

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए ‘गुफ़्तगू’ ब्लॉग पर जाएं >>>

 


पम्मी सिंह जी 2015 से ब्लॉग लेखन कर रहीं है। इसके अलावा आप अन्य समूह ब्लॉगों, चर्चा मंचों एवं वेब पत्रिकाओं में निरंतर सक्रिय रहती है और अापका एक कविता संग्रह भी प्रकाशित हो चुका है।

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