Poem - March 24, 2018

जल, अनमोल.. | ब्लॉग अभिव्यक्ति

जल ही जीवन है

जानते हैंं सब
पर रखते इसका ध्यान कितने
कि बचाना है इसको
करके जतन
समझना होगा इसका मोल
क्योंकि ये तो है अनमोल
बहते नल दिन रात कहीँ
नल चलते जब ब्रश करते

नल चलते, बरतन धुलते

 

 


शुभा मेहता सितम्बर 2013 से ब्लॉगिंग कर रही है और बचपन से ही पढ़ने की शौकीन है। उनके प्रोफाइल के अनुसार शुभा जी कहती है कि मैं अपने जीवन की छोटी छोटी अनुभूतियों को कविताओं और लेखों में पिरोने की कोशिश करती हूँ।

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