Poem - September 14, 2017

जाने कब खत्म होगा, ये इंतज़ार… | ब्लॉग नई सोच

ये अमावस की अंधेरी रात

तिस पर अनवरत बरसती
ये मुई बरसात..
और टपक रही मेरी झोपड़ी
की घास-फूस…
भीगती सिकुड़ती मिट्टी की दीवारें
जाने कब खत्म होगा  ये इन्तजार?
कब होगी सुबह…?
और मिट जायेगा ये घना अंधकार!

थम ही जायेगी किसी पल फिर यह बरसात

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें >>>

 


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