Poem - October 18, 2017

दीवाली | ब्लॉग मन के पाखी

(1)

लड़ियाँ नेह के धागों वाली,
झड़ियाँ हँसी ठहाकों वाली।
जगमग घर का कोना-कोना,
कलियाँ मन के तारों वाली।
रंग-रंगीली सजी रंगोली,
गुझिया मीठे पागों वाली।
घर-आँगन दमके चौबारा,
गलियाँ अल्हड़ साजों वाली।
एक दीवाली दिल को जोड़े,
खुशियाँ दिल के रागों वाली।
पूजन मात-पिता के प्रेम का
सखियाँ बहना भाबो वाली।
दीप जला ले प्रेमिल मन से,

बतियाँ हृदय के तागों वाली।

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए ‘मन के पाखी’ ब्लॉग पर जाएं >>>

 


श्रीमती श्वेता सिन्हा जी ने सन 2017 से ही ब्लॉग लिखना शुरू किया है और तब से लेकर अब तक 150 से ऊपर रचनाएं लिख चुकीं है। उन्होने इतने कम समय में भी ब्लॉग दुनिया में अपनी व अपने ब्लॉग की बेहतर पहचसन बना ली है। वैसे इस पहचान के लिए उनके लेखन को ही इसका श्रेय दिया जा सकता है। उनसे ई-मेल swetajsr2014@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।

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