Poem - March 10, 2018

फाग कहीं यो बीत न जाए! | ब्लॉग मेरी जुबानी

मैं बिरहन हूँ प्रेम की प्यासी

न रँग, न कोई रास है!
बदन संदली सूल सम लागे
कैसा ये एहसास है!
तुम जब से परदेस गए प्रिय
ये मन बड़ा उदास है!
बिना तुम्हारे रंग लगाए,
फाग कहीं यो बीत न जाए!
सखिया मोहे रोज छेड़ती
कहती क्यो तोरे पिया न आए!
टेसू पलाश के रंग न भाए,
गुलमोहर भी बिछ – बिछ जाए !
कस्तुरी सांसो की खुशबू,,

तुमको अपने पास बुलाए!

 

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए ‘मेरी जुबानी’ ब्लॉग पर जाएं >>>

 


सुधा सिंह जी शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ी हुई है। सन‍् 2015 से ब्लॉग लेखन कर रहीं है और अब तक कई मुद्दो पर लेख चुकी है। आप कविताओं के माध्यम से अपनी अभिव्यक्तियों को प्रकट करती है।

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