Poem - October 28, 2017

भूख से मौत | हिन्दी-आभा*भारत

संतोषी भात-भात कहते-कहते भूख से मर गयी,

हमारी शर्म-ओ-हया भी तो अब बेमौत मर गयी।
डिप्टी कमिश्नर ने जांच के बाद कहा –
वह तो मलेरिया से मर गयी,
हम पूछते हैं –
सरकार की ग़ैरत  कैसे  मर गयी?
मलेरिया के मरीज़ को भी भूख लगती है
मलेरिया से मरना मच्छर के माथे कलंक ?
कैसा मशीनी / डिजिटल समाज बना रहे हैं हम ?
भूख से मरना ही नहीं है सरकार के माथे कलंक!
भुखमरी में भारत को नया स्थान मिला है ,
ग्लोबल हंगर इंडेक्स में
119 देशों में  100 वां  स्थान मिला है,
गत  वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष

3 अंकों का नकारात्मक बोनस मिला है।

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए ‘हिन्दी-आभा*भारत’ ब्लॉग पर जाएं >>>

 


रविन्द्र सिंह यादव जी का परिचय उन्ही के शब्दों में : कविता, कहानी और लेख लिखते-लिखते समझ विकसित हुई तो पाया जीवनचर्या के लिए केवल लेखन कार्य पर निर्भर रहना नादानी है। वर्तमान में मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट के तौर पर नई दिल्ली में निजी संस्थान में कार्यरत। इटावा उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचल (महाराजपुरा, तहसील चकरनगर) में 14 जनवरी 1968 जन्म। म. प्र. के कई ज़िलों में रहकर शिक्षा प्राप्ति। आकाशवाणी ग्वालियर म.प्र. से 1992-2003 के बीच कविता, कहानी, वार्ता, विशेष कार्यक्रम आदि का नियमित प्रसारण। ग्वालियर से प्रकाशित होने वाले विभिन्न दैनिक समाचार-पत्रों में लेख व कविताओं का प्रकाशन।

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