Poem - October 17, 2017

माँ पर दो बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़लें | ब्लॉग उड़ती बात

माँ पर ख़ूबसूरत ग़ज़ल-दुआयें

दुआयें माँ की, कभी कम नहीं होतीं
माँ तो माँ है, ख़ुदा से कम नहीं होती।

माँ कल ख़ुदा से, ज़बाबतलबी करती रही
मुश्किलें क्यों, बेटे की कम नही होतीं।

एक दिन मेरा बेटा भी, सिकन्दर बनेगा
माँ की उम्मीदें, कभी कम नहीं होतीं।

मेरा पहला गुनाह, और माँ का वो थप्पड़
सबक देने में, माँ को शरम नहीं होती।

मुझसे बेहतर जानती है, जीने का सलीका
माँ की ख़ुश मिज़ाजी, कम नही होती।

मेरा दावा है कि, दुनिया मे कोई भी चीज़
माँ के दिल से ज्यादा, नरम नही होती।

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अमित जैन ‘मौलिक’ लेखक, कवि एवं एंकर है। आप मूलतः रेस्तरा व्यवसाय में है और जबलपुर, मध्यप्रदेश के निवासी है। लेखक ज़्यादातर रोमांटिक शायरी, ग़ज़ल, गीत, कवितायें लिखते है, इसके साथ ही भाषण, मंच संचालन सामग्री, कहानियाँ एवं नुक्कड़ नाटक आदि भी लिखते है।

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