Poem - February 13, 2018

मोहब्बत किसी भी मनुष्य का मूल स्वभाव है | ब्लॉग ऊंचाईयाँ

“मैं मोहब्बत हूँ

किसी भी मनुष्य का मूल स्वभाव हूँ “
मैं मोहब्बत जीती हूँ 😍
एहसासों में ,जज़्बातों में
मोहब्बत का कोई मजहब नहीं
मोहब्बत तो हर दिल की भाषा है ❤
शब्द नहीं ,अर्थ नहीं ,
निस्वार्थ समर्पण है
दुआओं में ,दर्द में
क्रन्दन में ,क्रोध में
उम्र का बन्धन नहीं
रिश्तों की मोहताज नहीं
उपहार नहीं ,व्यापार नहीं
भावों में जज़्बातों में
मैं मोहब्बत हूँ ,मैं किसी भी
मनुष्य का मूल स्वभाव हूँ

मोहब्बत से ही सींचित

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए ‘ऊंचाईयां’ ब्लॉग पर जाएं >>>

 


श्रीमती रितु आसूजा जी सन 2013 से ब्लॉग लिख रहीं है और तब से लेकर अब तक प्रेरक और समाजिक लेखन के जरिए ब्लॉग जगत में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। उनसे ई-मेल ritu.asooja1@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।

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