Poem - September 1, 2017

राम रहीम | ब्लॉग बोल सखी रे

राम और रहीम दोनों ने मर्यादा में रहना सिखाया,
समाज के नियमों का हमेशा पाठ पढ़ाया।

जब जब मानवता पर आंच आयी,
दोनों ने इंसान को कमर कसना सिखाया।

अब न राम की मर्यादा है, न रहीम की इंसानियत,
साधुओं में भर गयी है सिर्फ हैवानियत।

मठों में, आश्रमों में पाप का बोलबाला है,
ऊपर ऊपर सादगी अंदर गड़बड़झाला है।

धर्म के नाम पर पाप रचा जाता है,
सीधा सादा इंसान जाल में फंस जाता है।

 

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अपर्णा बजपेयी जी जम्शेद्पुर में रहती है। आपने 2016 में ही ब्लॉग लेखन शुरू किया है और वर्तमान में झारखंड में आदिवासियों के बीच स्वास्थ, शिक्षा, आजीविका के मुद्दे पर काम कर रहीं है। दैनिक हिन्दुस्तान, जन संदेश टाइम्स, कथाक्रम तथा अन्य कई पत्र पत्रिकाओं में आपकी कविता और कहानियां प्रकाशित हो चुकी हैं।

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