Poem - April 25, 2018

वाह री दुनियाँ | अभिव्यक्ति

दूर के ढोल सुहावने

पास बजें तो शोर
घर की मुर्गी दाल बराबर
बाहर की अनमोल
कोई अपना ज्ञान बखाने
अधजल गगरी को छलकाए
कोई भैंस के आगे बीन बजाए
पर उसको कुछ समझ न आए
सबको अपना-अपना ध्यान

अपनी ढ़़फली अपना राग

 

 


शुभा मेहता सितम्बर 2013 से ब्लॉगिंग कर रही है और बचपन से ही पढ़ने की शौकीन है। उनके प्रोफाइल के अनुसार शुभा जी कहती है कि मैं अपने जीवन की छोटी छोटी अनुभूतियों को कविताओं और लेखों में पिरोने की कोशिश करती हूँ।

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