Poem - March 24, 2018

सुख-दुख के भंवरजाल से माँ बचा लो… | ब्लॉग नई सोच

जाने क्या मुझसे खता हो गयी ?

यूँ लग रहा माँ खफा हो गई…
माँ की कृपा बिन जीवन में मेरी
देखो तो क्या दुर्दशा हो गयी……
माँ! माफ कर दो, अब मान जाओ
इक बार मुझ पर कृपा तो बनाओ
कृपा बिन तो मेरी उजड़ी सी दुनिया
माँ ! बर्बाद होने से मुझको बचाओ…..
माँ! तेरे आँचल के साया तले तो
चिलमिलाती लू भी मुझे छू न पायी
तेरी ओट रहकर तो तूफान से भी,
निडर हो के माँ मैंने नजरें मिलाई…..
तेरे साथ बिन मेरा,  मन डर रहा माँ !

तन्हा सा जीवन, भय लग रहा माँ !

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए ब्लॉग ‘नई सोच’ पर जाएं >>>

 


सुधा देवरानी जी 2016 से ब्लॉगिग कर रहें है और अपनी कविताओं को नई सोच ब्लॉग के माध्यम से पाठको के बीच रख रहीं है। ब्लॉगर सुधा जी से ई-मेल sdevrani16@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है।

यदि आप भी अपनी ब्लॉग पोस्ट को अधिक से अधिक पाठकों तक पहुंचाना चाहते है। तो अपने ब्लॉग की नई पोस्ट की जानकारी या सूचना हमें दें। अपनी ब्लॉग की पोस्ट शेयर करने के लिए अपने ब्लॉग पोस्ट का यूआरएल और अपने बारे में संक्षिप्त जानकारी एवं फोटो सहित हमें – iblogger.in@gmail.com पर ई-मेल करें।



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *