Poem - February 18, 2016

सूरजमुखी

एक  सूरजमुखी का फूल

सूर्य दर्शन में आकूल
सुबह सुबह पूर्व दिशा में
सूरज की प्रतीक्षा में
सहस्र स्वर्ण पंख फैलाकर
अविकल सूर्य की प्रतिबिम्ब  बनकर
खड़ा है लोहित  किरणों की स्वागत में।

पूरब के उदयाचल से पश्चिम के अस्ताचल
सूरजमुखी निहारता सूरज को हर पल ,
सूरज के अस्त होते ही
सूरजमुखी झुक जाता है,
नत मस्तक होता है, दू:ख से
यह प्रकृति का सम्वेदनशीलता नहीं, तो और क्या है ?

पशु-पक्षी, वृक्ष-लता
सब में है सम्वेदनशीलता ,
मनुष्य संवेदनशीलता में शीर्ष में है
पर उसमे इतना विरोधाभाष क्यों है ?
वह दूसरे का खून का प्यासा क्यों है?
समझ में नहीं आता।

 
 
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