Poem - April 20, 2018

हमें जहाँ की कहाँ पड़ी है | ब्लॉग मन से

मरती है तो मर जाने दो
हमें जहाँ की कहाँ पड़ी है
पागल है लड़की की माँ
जो न्याय की खातिर जिद पे अड़ी है
शोक प्रदर्शन खत्म हो चुका
अब घरवालों को सहने दो
प्रेम नगर के वासी हैं हम
प्रेम नगर में रहने दो
बहन, बेटियाँ बाजारों में
बिकती हैं तो बिकने दो
सुंदर और सजीले तन पर
नजर हमारी टिकने दो
हमको क्या लेना-देना है
सरहद के गलियारों से
शोहरत बहुत कमा बैठे हम
कविता के  व्यापारों से
कोई नही होता अब घायल
शब्दों के हथियारों से

हमको क्या लेना-देना है

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए ‘मन से’ ब्लॉग पर जाएं >>>

 


नीतू ठाकुर जी ने अक्टूबर 2017 में ब्लॉग लेखन शुरू किया है। अब तक आप अन्य समूह ब्लॉगों, चर्चा मंचों एवं वेब पत्रिकाओं में निरंतर सक्रिय रहती है।

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