Poem - March 10, 2018

हाँ मैं औरत हूँ | ऊंचाईयाँ

🎉🎉🎉🌺🌺  🎉” हाँ मैं औरत हूँ 🎉🌺🌺🏡☕🏡📖📖🌹🌹🎉🎉

🌺 हाँ मैं औरत हूँ 🌺
मुझ बिन धरती का
अस्तित्व अधूरा है ,
कोई मुझे कुचलता है
तो इसमें मेरा क्या दोष …….
निर्दयी हैं वो ,पापी हैं वो 🌺
क्रूर हैं वो ,
रावण या कंस से भी घिनौने हैं वो
जो अपने ही बाग़ों में खिले गुलाबों
को , कलियों को कुचलते हैं
हाँ मैं औरत हूँ मुझसे ही महकता
सरा जहाँ है ,मैं ही तो सारे जहाँ की 🌺

रौनक़ हूँ ।🌺

 

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए ‘ऊंचाईयां’ ब्लॉग पर जाएं >>>

 


श्रीमती रितु आसूजा जी सन 2013 से ब्लॉग लिख रहीं है और तब से लेकर अब तक प्रेरक और समाजिक लेखन के जरिए ब्लॉग जगत में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। उनसे ई-मेल ritu.asooja1@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।

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