Poem - September 11, 2017

फ़लसफ़ा | ब्लॉग ऊंचाईयाँ

खिले-खिले पुष्पों से ही घर, आँगन महकते है,

प्रकृति प्रदत्त, पुष्प भी किसी वरदान से कम नहीं
अपने छोटे से जीवन में पूरे शबाब से खिलते हैं पुष्प
और किसी न किसी रूप में काम आ ही जाते हैं
जीवन हो तो पुष्पों के जैसा, छोटे से सफ़र में बेहद की
हद तक उपयोगी बन जाते हैं।

जीवन का भी यही फ़लसफ़ा है,
बुझे हुए चिरागों को किनारे कर,
जलते हुए चिरागों से ही घर रोशन किये जाते हैं।
क्योंकि जो जलता है, वही जगमगाता है।

कभी-कभी यूँ ही मुस्करा लिया करो
गीत गुनगुना लिया करो।
जीवन का संगीत हमेशा
मधुर हो आवयशक नहीं।

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए ‘ऊंचाईयां’ ब्लॉग पर जाएं >>>

 


श्रीमती रितु आसूजा जी सन 2013 से ब्लॉग लिख रहीं है और तब से लेकर अब तक प्रेरक और समाजिक लेखन के जरिए ब्लॉग जगत में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। उनसे ई-मेल ritu.asooja1@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है। रितु जी काे फेसबुक पर फालों करने के लिए यहां क्लिक करें।

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