Poem - October 2, 2018

जानी ऐसी कला उस कलाकार की | ब्लॉग अभिव्यक्ति

कुछ उलझने ऐसे उलझा गयी
असमंजस के भाव जगाकर
बुरी तरह मन भटका गयी,
जब सहा न गया, मन व्यथित हो उठा
आस भी आखिरी सांस लेने लगी
जिन्दगी जंग है हार ही हार है
नाउम्मीदी ही मन में गहराने लगी
पल दो पल भी युगों सा तब लगने लगा
कैसे ये पल गुजारें ! दिल तड़पने लगा
थक गये हारकर , याद प्रभु को किया
हार या जीत सब श्रेय उनको दिया
मन के अन्दर से “मै” ज्यों ही जाने लगा
एक दिया जैसे तम को हराने लगा
बन्द आँखों से बहती जो अश्रुधार थी
सूखती सी वो महसूस होने लगी
नम से चेहरे पे कुछ गुनगुना सा लगा

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सुधा देवरानी जी 2016 से ब्लॉगिग कर रहें है और अपनी कविताओं को नई सोच ब्लॉग के माध्यम से पाठको के बीच रख रहीं है। ब्लॉगर सुधा जी से ई-मेल sdevrani16@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है।
SourceBLOG - NAI SOCH


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