Poem - 2 weeks ago

कौन है हम | संजोयी हुई रचनाएं – 2

यह दूसरी रचना भी मेरे संकलन से प्रस्तुत है, मै इसका मूल लेखक नहीं हूं, बस प्रस्तुतकर्ता हूं। मुझे ये अच्छी लगी इसलिए मैने 2005 में हरियाणा में आयोजित एक वर्कशॉप के दौरान सुना था, जिसे मैने अपनी डायरी में लिख लिया था। जो आपके लिए प्रस्तुत है-

कौन है हम और है आये कहां से
क्या है हमारा ठिकाना
हंस देते है हम, जो पुछे है हमसे
बाते यही है जमाना।

गाते है क्यूं और चिल्लाते है क्यूं हम
बेकार है ये बताना
हमारे लिये तो लहू गर्म रखने का
छोटा सा है इक बहाना।

मगर याद रखना, लहू की हमारे
जो गर्मी रहेगी, यहां पर
उसे अपने खूं की, हर इक बूंद से है
उसी से है उबाला लगाना।

आये है हम तो, चले जायेगें भी
रह जायेगा ये तराना
कसम है तुम्हे कि हां बाद हमारे
तुम भी इसे गुनगुनाना।

Present by : Rajender Singh Bisht



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