Poem - 3 weeks ago

रवि शशि दोनों भाई-भाई | ब्लॉग नई सोच

स्कूल की छुट्टियां और बच्चों का आपस में
लड़ना झगड़ना…..
फिर शिकायत…. बड़ों की डाँट – डपट……
पल में एक हो जाना….अगले ही पल रूठना…
माँ का उन्हें अलग-अलग करना…
तो एक-दूसरे के पास जाने के दसों बहाने ढूँढ़ना….
न मिल पाने पर एक दूसरे के लिए तड़पना….

तब माँ ने सोचा—
यही सजा है सही, इसी पर कुछ इनको मैं बताऊँ,
दोनोंं फिर न लड़ें आपस में,ऐसा कुछ समझाऊँ…

दोनोंं को पास बुलाकर बोली….
आओ बच्चों तुम्हें सुनाऊँ एक अजब कहानी,
ना कोई था राजा जिसमें ना थी कोई रानी…

बच्चे बोले–तो फिर घोड़े हाथी थे…?
या हम जैसे साथी थे….!!

माँ बोली—हाँ ! साथी थे वे तुम जैसे ही
रोज झगड़ते थे ऐसे ही…

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए ब्लॉग ‘नई सोच’ पर जाएं >>>


सुधा देवरानी जी 2016 से ब्लॉगिग कर रहें है और अपनी कविताओं को नई सोच ब्लॉग के माध्यम से पाठको के बीच रख रहीं है। ब्लॉगर सुधा जी से ई-मेल sdevrani16@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है।
SourceNAI SOCH BLOG


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