Poem - 3 weeks ago

सपने जो आधे-अधूरे | ब्लॉग नई सोच

कुछ सपने जो आधे -अधूरे
यत्र-तत्र बिखरे मन में यूँ
जाने कब होंगे पूरे ….?
मेरे सपने जो आधे -अधूरे

दिन ढ़लने को आया देखो
सांझ सामने आयी…..
सुबह के सपने ने जाने क्यूँ
ली मन में अंगड़ाई…

बोला; भरोसा था तुम पे
तुम मुझे करोगे पूरा…
देख हौसला लगा था ऐसा
कि छोड़ न दोगे अधूरा…

डूबती आँखें हताशा लिए
फिर वही झूठी दिलाशा लिए
चंद साँसों की आशाओं संग
वह चुप फिर से सोया…
देख दुखी अपने सपने को
मन मेरा फिर-फिर रोया…

<<< पूरी रचना पढ़ने के लिए ब्लॉग ‘नई सोच’ पर जाएं >>>


सुधा देवरानी जी 2016 से ब्लॉगिग कर रहें है और अपनी कविताओं को नई सोच ब्लॉग के माध्यम से पाठको के बीच रख रहीं है। ब्लॉगर सुधा जी से ई-मेल sdevrani16@gmail.com पर स्म्पर्क किया जा सकता है।
SourceBLOG // NAI SOCH


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