Social - 2 weeks ago

क्रांतिकारी मुनि तरुण सागर जी की जीवनी व अवदान | ब्लॉग उत्तम जैन (विद्रोही)

तुम्हारी वजह से कोई इ्ंसान दुखी रहे अगर तुम्हारी वजह से कोई इ्ंसान दुखी रहे तो समझ लो ये तुम्हारे लिए सबसे बड़ा पाप है, ऐसे काम करो कि लोग तुम्हारे जाने के बाद दुखी होकर आसूं बहाए तभी तुम्हें पुण्य मिलेगा।

जैन मुनि तरुण सागर जी 1 सितंबर 2018 शनिवार को निधन हो गया। 20 दिन पहले उन्हें पीलिया होने के बाद दिल्ली के मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका इलाज चल रहा था लेकिन उनकी सेहत में सुधार नहीं हुआ। कुछ दिन से उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही थी।
मुनि श्री तरुण सागर जी महाराज का परिचय —
पूर्व नाम : श्री पवन कुमार जैन
जन्म तिथि : २६ जून, १९६७,
ग्राम : गुहजी (जि.दमोह ) म. प्र.
माता-पिता : महिलारत्न श्रीमती शांतिबाई जैन व श्रेष्ठ श्रावक श्री प्रताप चन्द्र जी जैन
लौकिक शिक्षा : माध्यमिक शाला तक
गृह – त्याग :८ मार्च , १९८१
शुल्लक दीक्षा : १८ जनवरी , १९८२, अकलतरा ( छत्तीसगढ़) में
मुनि- दीक्षा : २० जुलाई, १९८८, बागीदौरा (राज.)
दीक्षा गुरु : यूगसंत आचार्य पुष्पदंत सागर जी
लेखन : हिन्दी
बहुचर्चित कृति : मृत्यु- बोध
मानद-उपाधि : ‘प्रज्ञा-श्रमण (आचार्यश्री पुष्पदंत सागरजी द्वारा प्रदत)
प्रख्यायती : क्रांतिकारी संत कीर्तिमान : आचार्य भगवंत कुन्दकुन्द के पश्चात गत 2000 वर्षो के इतिहास मैं मात्र १३ वर्स की वय में जैन
सन्यास धारण करने वाले प्रथम योगी |
रास्ट्र के प्रथम मुनि जिन्होंने लाल किले दिल्ली से सम्बोधन .टी.वी. के माध्यम से भारत सहित १२२ देशों में महावीर – वाणी ‘ के विश्व -व्यापी प्रसारन की ऐतिहासिक सुरुआत करने का प्रथम श्रेय
मुख्य – पत्र : अहिंसा – महाकुम्भ (मासिक)
आन्दोलन : कत्लखानों और मांस -निर्यात के विरोध में निरंतर
अहिंसात्मक रास्ट्रीय आन्दोलन
सम्मान : ६ फरवरी ,२००२ को म.प्र. शासन द्वारा’ राजकीय अतिथि ‘ का दर्जा
२ मार्च , २००३ को गुजरात सरकार द्वारा ‘ राजकीय अतिथि ‘का सम्मान
साहित्य :तीन दर्जन से अधिक पुस्तके उपलब्ध और उनका हर वर्ष दो लाख प्रतियो का प्रकाशन
रास्ट्रसंत : म. प्र. सरकार द्वारा २६ जनवरी , २००३ को दशहरा मैदान , इन्दोर में
संगठन : तरुण क्रांती मंच .केन्द्रीय कार्यालय दिल्ली में देश भर में इकाईया
प्रणेता : तनाव मुक्ति का अभिनव प्रयोग ‘ आंनंद- यात्रा ‘ कार्यक्रम के प्रणेता
पहचान : देश में सार्वाधिक सुने और पढ़े जाने वाले तथा दिल और दिमाग को झकजोर देने
वाले अधभुत .प्रवचन
अपनी नायाब प्रवचन शैली के लिए देसभर में विखाय्त जैन मुनि के रूप में पहचान
मिशन : भगवान महावीर और उनके सन्देश ” जियो और जीने दो ” का विश्व व्यापी प्रचार प्रसार एवम जीवन जीने की ….

CLICK HERE TO READ THE FULL POST


गुजरात निवासी ब्लॉगर उत्तम जैन एक समाचार पत्र के संपादक व प्रकाशक है। उत्तम जी 2017 से ब्लॉगिंग कर रहे है।

 


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *